Thursday, 2 February 2012

तेरी नज़रें फिर ' मय ' बन जाती ....



मैं भी था कुछ काफ़ी काफ़ी , ' मय ' भी थी कुछ काफ़ी काफ़ी ..

पर रात कटी तो देखा कि, मैं तो हूँ कुछ बाकी सा,पर ' मय ' ना है बाकी...
 

छिपे सितारों कि रौशनी में तुम , क़ाश लौट आता तेरा साया भर ही ..
 

तेरी नज़रें फिर ' मय ' बन जाती,  तू फिर से बन जाता साकी ...

शशि ' दिल से